
अरमान हो तुम उस सावन की तरह
रिमझिम सी बुत हो मेरे अरमानों की
सहलाती है तेरी खुश्बू मेरे मन को
रूह को छूती है तेरी उर्दू भरी अलफ़ाज़
रात की ओट में आना जाना है तेरा
झांकना मेरे सपनो में अदा है तेरी
कुछ लम्हों की झलक तेरे हुस्न का
लगता है जैसे फिजाओं में मंजर हो सदियो से
शरारत मेरी निगाहों का नही,शरारा तेरे जिस्म का
जुर्म मेरा नही, खता खुदा की है
पनाह की गुजारिश है तेरे प्यार में
हुस्न और इश्क का दीदार चाहता हूँ
जो फ़साना कहा नही इन लब्जों से
कहा है हर दफा वो इन निगाहों से
तमन्ना है उस कायनात के रात की
जब सासों की मिलन तेरे मेरे बीच होगी !!