
वक़्त का रुख बुरा है अभी
ओट में छिपी है ज़िन्दगी
लहरों में है खामोशियाँ
उल्झन में है तनहाइयाँ
कशमकश में है मुस्कुराहटें
है बेबसी का आलम
लेकिन अरमानो की बारिश में भींगा है मन
चल पड़ा हूँ दस्तक देने वक़्त के दरवाज़े
किस्मत की तक़दीर बदलने
दर्द का हर दर्द छीन लेने
चाँद का अस्तित्व मिटाने
और सूरज को दफ्न करने ..