चला जा रहा हूँ जिंदगी की आस में |
जिद्द है उड़ने की इस ख़ुले आसमान में |
जिद्द है उड़ने की इस ख़ुले आसमान में |
लेकिन जिंदगी को जिंदगी से कोई आस नही |
बचाता फिर रहा हूँ इस रूठे वक़्त से अपने दामन को|
लेकिन रोंदे जा रहा है जिंदगी के दामन को |
किस्मत ने किये है जिंदगी को तार -तार |
अब तो पता नही चलता कितने है घाव |
किस्मत को कौंसना भी अब कम पड़ता है |
लेकिन ज़िदा हूँ अभी,जिंदगी की आस में ||